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क्या है खासियत बैसाखी पर्व की, कैसे मनाते है पंजाब में इसे

Sunday, April 14, 2019 02:17:07 PM
क्या है खासियत बैसाखी पर्व की, कैसे मनाते है पंजाब में इसे

बैसाखी वैशाख से बना है, यह पंजाब और आसपास के प्रदेशों का सबसे बड़ा त्योहार है। पंजाब व हरियाणा के किसान फसल काट लेने के बाद नए साल की खुशियाँ मनाते हैं। यह त्योहार सिख और हिन्दुओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण व ख़ास है।

13 अप्रैल 1699 को दसवें गुरु गोविन्द सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। सिख इस त्योहार को सामूहिक जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं। यह रबी की फसल के पकने की खुशी का प्रतीक है| पूरे देश में श्रद्धालु गुरुद्वारों में अरदास के लिए जाते हैं। मुख्य समारोह आनंदपुर साहिब में होता है, जहाँ पंथ की नींव रखी गई थी। सुबह 4 बजे गुरु ग्रंथ साहिब जी को समारोहपूर्वक कक्ष से बाहर लाया जाता है| उसके बाद दूध और जल से स्नान कराते है फिर गुरु ग्रंथ साहिब जी को तख्त या आसान पर बैठाया जाता है। इसके बाद पंच प्यारे ‘पंचबानी’ गाते हैं।

दिन में अरदास के बाद गुरु को कड़ा प्रसाद का भोग लगाता है। प्रसाद ग्रहण कर सभी लोग लंगर के लिए जाते है| कई श्रद्धालु इस दिन सेवा करते हैं। दिनभर गुरु गोविंदसिंह और पंच प्यारों के सम्मान में भजन और कीर्तन गाए जाते हैं| शाम को सारे परिवार के लोग व समस्त जन आग के आसपास इकट्ठे होकर नई फसल की खुशियाँ मनाते हैं। इस दिन पंजाब का लोकप्रिय नृत्य भांगड़ा और गिद्दा से किया जाता है|

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