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सावन का तीसरा सोमवार: भगवान शिव को खुश करने के लिए ऐसे करें पूजा, सभी मनोकानाएं होगी पूरी

Sunday, August 12, 2018 11:18:25 PM
सावन का तीसरा सोमवार: भगवान शिव को खुश करने के लिए ऐसे करें पूजा, सभी मनोकानाएं होगी पूरी

इंटरनेट डेस्क। सावन के महीने में सोमवार का दिन महत्वपूर्ण होता है, सावन में हर सोमवार अपने कुछ साथ खास लेकर आता है। जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि कल सावन माह का तीसरा सोमवार है, यह दिन पूजा और व्रत आदि कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है।

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महत्व
सावन का पूरा माह भगवान शिव को समर्पित है, सावन में बारिश की हर बूंद में शिव का वरदान मानी जाती है। सावन का यह पूरा माह कल्याणकारी होता है, सावन के तीसरा सोमवार महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि भोलेनाथ का संख्या 3 के साथ खास लगाव है। ज्योतिष के अनुसार भगवान शिव सृष्टि के तीनों गुणों को नियंत्रित करते हैं, यह बात हम सभी जानते है कि भगवान शिव त्रिनेत्रधारी हैं, शिव जी की पूजा भी तीन रूपों में की जाती है, तीनों स्वरूपों की पूजा-अर्जना के लिए सावन का तीसरा सोमवार खास होता है।

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सभी मनोकामनाएं होगी पूरी
बता दें कि कल सावन का तीसरा सोमवार है और इस दिन भगवान शिव के तीनों स्वरूपों की पूजा कर के मनोकामनाओं की पूर्ति की जा सकती है।

भगवान शिव के तीन स्वरूप
जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि भगवान शिव के दिन स्वरूप होते है, आइये आज हम आपको इस ज्योतिष आर्टिकल में बताएंगे तीनों स्वरूपों के बारे में

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 नील कंठ 

सावन के माह में समुद्र मंथन हुआ था। उस दौरान समुद्र मंथन में हलाहल विष का प्याला निकला तो भगवान शिव में संसार की रक्षा के लिए पी लिया। उन्होंने हलाहल विष को अपने कंठ में ही रोक लिया, जिसकी वजह से उनका कंठ नीला हो गया। इसी कारण भगवान शिव को नील कंठ कहा जाता है। इस स्वरूप की उपासना करने से शत्रु, षडयंत्र, तंत्रमंत्र आदि का प्रभाव नहीं होता है, सावन के तीसरे सोमवार को भगवान शिव पर गन्ने का रस चढ़ाएं।

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नटराज

कहा जाता है कि भगवान शिव ने ही संसार में नृत्य, संगीत और कला का आविष्कार किया है। नृत्य और कला में कई सूक्ष्म चीजें भी भगवान शिव जी ने अपने शिष्यों को बताई हैं। उन्होंने ऐसे नृत्यों का आविष्कार किया, जिसका सीधा प्रभाव हमारे मन, शरीर और आत्मा पर पड़ता है। इसी कारण भगवान शिव का नटराजन भी कहते है।

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महामृत्युंजय

कहा जाता है कि भगवान शिव को मृत संजीवनी विद्या का ज्ञान है, अर्थात वह अकाल मृत्यु जैसी आपदा को भी दूर कर सकते हैं। भोलेनाथ के तीसरे स्वरूप की पूजा सावन के तीसरे सोमवार को होती है, भोलेनाथ इस रूप में अमृत के कलश से अपने भक्तगणों की रक्षा करते है। इस स्वरूप की पूजा करने से अकाल मृत्यु से रक्षा होती है, शिव का मृत्युंजय रूप आयु, रक्षा, अच्छी सेहत और मनोकामनाओं को पूराी करने वाला होता है, सावन के तीसरे सोमवार के दिन भगवान शिव को ख्ुाश करने के लिए बेलपत्र, जलधारा अर्पति करें। मृत्युंजय स्वरूप का मंत्र है ‘ऊं हौं जूं स:

Source: Google

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