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शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन होती है देवी चंद्रघंटा की पूजा

Friday, October 12, 2018 10:08:11 AM
शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन होती है देवी चंद्रघंटा की पूजा

इंटरनेट डेस्क। शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। माता चंद्रघंटा का रूप बहुत ही सुंदर सौम्य है। मां का यह स्वरूप शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके सिर पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनका शरीर सोने के समान चमकता हुआ है, इनके दस हाथ हैं। दसों हाथों में खड्ग, बाण आदि शस्त्र सुशोभित रहते हैं, इनका वाहन शेर है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने वाली है।

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इनके घंटे की तेज ध्वनि से दानव, अत्याचारी, दैत्य, राक्षस डरते रहते हैं। इस दिन साधक का मन मणिपुर चक्र में प्रविष्ट होता है। मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक को अलौकिक दर्शन होते हैं, दिव्य सुगन्ध और विविध दिव्य ध्वनियां सुनाई देती हैं। यह क्षण साधक के लिए अत्यंत सावधान रहने के होते हैं। मां चन्द्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएं विनाशकारी हो जाती हैं। इनकी अराधना सद्यः फलदायी है ।

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इनकी मुद्रा सदैव युद्ध के लिए अभिमुख रहने की होती हैं, अतः भक्तों के कष्ट का निवारण ये शीघ्र कर देती हैं। मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक की समस्त परेशानियां हट जाती हैं। भगवती चंद्रघंटा का ध्यान, स्तोत्र और कवच का पाठ करने से मणिपुर चक्र जाग्रत हो जाता है और सांसारिक परेशानियों से राहत मिल जाती है ।

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मंत्र का जाप करें

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम॥

Source: Google

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