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हर्निया का इलाज हुआ और भी आसान, जानिए कैसे?

Sunday, November 12, 2017 02:28:38 PM
हर्निया का इलाज हुआ और भी आसान, जानिए कैसे?

हेल्थ डेस्क: इस दुनिया में कई ऐसी बीमारिया है जिनका उपचार का कोई साधन नहीं होता है, आखिर में उस बीमारी का इलाज होता है आदमी की मोत हो जाना। इस प्रकार की कई बीमारिया है जिनका डॉक्टर्स कुछ नहीं कर पाते हैl ऐसी ही हम एक बीमारी के बारे में हम आपको बता रहे है जिसका इलाज अब आसान हो गया है। हर्निया की सर्जरी करना कोई आसान काम नहीं है लकिन दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल ने इसका इलाज आसान करने के लिए एक सस्ती तकनीक ढूढ निकनि है। इस तकनीक की खोज डॉक्टर मनीष कुमार गुप्ता ने की है इसलिए इस तकनीक का ‘555 मनीष टेक्निक’ नाम रखा गया है। इस तकनीक से 100 से ज्यादा इंसान ने फायदा उठाया है।

डॉक्टर मनीष का कहना है की यह तकनीक न केवल सस्ती है, बल्कि इससे 5 एमएम के 3 की-होल बनाकर यह सर्जरी की जा सकती है। उन्होंने आगे कहा है की इस सर्जरी के लिए पहले ओपन सर्जरी की जाती थी। ओपन सर्जरी के बाद इस सरजारो को लेप्रोस्कोपी, यानी दूरबीन की मदद किया जाने लगा। लेकिन अब इस सर्जरी को इस तकनिक से की जाएगी। उन्होंने कहा की अब तक की जाने वाली सर्जरी में चौड़े हसन ट्रोकार का इस्तेमाल करते हुए हर्निया तक पहुंचा जाता था। हसन ट्रोकार के लिए नाभि के नीचे 1.5 से 2 सेंटीमीटर का कट लगाया जाता था। इस सर्जरी से अब गरीब व्यक्तियों को पेसो से भी राहत मिलेगी और इस सर्जरी से उनको दर्द भी थोड़ा कम होगा।

जानिए इस सर्जरी के फायदे
इस सर्जरी से मात्र 2 मिनट में सर्जरी प्‍वाइंट का पता लग जाता है जिससे मरीज व डॉक्टर्स दोनों को फायदा होगा। साथ ही इससे चीरा कम होने के कारण संक्रमण की आशंका भी नहीं होती है। डॉक्टर्स मनिष ने कहा की इस सर्जरी से दोबारा हार्निया का खतरा 1 फीसदी से भी कम होता है। उन्होंने बताया कि इस नई तकनीक से 3 पांच एमएम के छिद्रों से ग्रोइन हर्निया का सफल ऑपरेशन किया जाता है। मनीष ने कहा की इस सर्जरी से मरीज को कोई नुकसान नहीं होता है, यानि इस सर्जरी से मरीज को कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता है। पुरानी तकनीक में 12 एमएम का एक छेद किया जाता था लेकिन इस सर्जरी से मात्र 5 एमएम का छेद होगा।

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