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तमाम संभावनाओं के बीच इसरो ने लैंडर के बारे में कही यह बात, बोला- हमने लैंडर में एक ऐसी…

तमाम संभावनाओं के बीच इसरो ने लैंडर के बारे में कही यह बात, बोला- हमने लैंडर में एक ऐसी…

चंद्र सतह पर विक्रम लैंडर के गिरने से इसरो अभी भी निराश नहीं है। यह अलग बात है कि विक्रम लैंडर अपने निर्धारित स्थान से करीब 500 मीटर दूर चांद की जमीन पर गिर गया है, लेकिन अगर संपर्क स्थापित हो जाता है तो वह वापस अपने पैरों पर खड़ा हो जाएगा। इसरो के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, चंद्रयान -2 के विक्रम लैंडर में ऐसी तकनीक है जो गिरने के बाद भी अपने आप खड़ी रह सकती है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि वह अपनी संचार प्रणाली से संपर्क करे और कमांड प्राप्त करे।

विक्रम लैंडर के पास एक ऑनबोर्ड कंप्यूटर है। यह अपने दम पर कई कार्य कर सकता है। विक्रम लैंडर के पतन के साथ, ऐन्टेना जिसके माध्यम से संचार प्रणाली को कमांड भेजे जा सकते हैं। अभी इसरो के वैज्ञानिक किसी तरह विक्रम लैंडर को उस एंटीना के जरिए अपने पैरों पर खड़े होने का आदेश दे रहे हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि विक्रम लैंडर अपने आप कैसे खड़ा होगा। क्या कोई उसे वहां ले जाएगा?

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इसरो के सूत्रों ने बताया कि विक्रम लैंडर के बेल्ट के नीचे पांच थ्रस्टर्स हैं। जिसके माध्यम से इसे चंद्र सतह पर एक सॉफ्ट लैंडिंग करना पड़ा। इसके अलावा, विक्रम लैंडर के आसपास थ्रस्टरों को भी रखा गया है, जो इसकी दिशा निर्धारित करने के लिए अंतरिक्ष में यात्रा करने के लिए कमीशन किया गया था। ये थ्रस्टर अभी भी सुरक्षित हैं। लैंडर का वह हिस्सा जहां संचार एंटीना दबाया जाता है, उसी भाग में थ्रस्टर्स भी होते हैं। यदि पृथ्वी पर स्थित ग्राउंड स्टेशन से भेजी गई कमांड सीधे या प्राप्त हो जाती है, तो इसके थ्रस्टर्स चालू हो जाएंगे। जब थ्रस्टर्स चालू होंगे, तो विक्रम एक तरफ से उठ जाएगा और अपने पैरों पर खड़ा हो जाएगा। अब बस भगवान से यही प्रार्थना है कि जल्द से जल्द हमारा संपर्क विक्रम से हो जाए।

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