ज्योतिष & धर्म

अपने ही दामाद को शुक्राचार्य ने दे डाला ये श्राप और फिर…

Friday, January 12, 2018 12:25:29 PM
अपने ही दामाद को शुक्राचार्य ने दे डाला ये श्राप और फिर…

धर्म डेस्क: नहुषा राजे के पुत्र ययाति ने शंकराचार्य की बेटी देवयानी से विवाह किया और फिर राजा भी बने गए थे, शादी से पहले शुक्राचार्य ने सख्त हिदायत दी थी की मेरी बेटी के अलावा किसी से सम्बन्ध नही रखोगे। दोनों का जीवन सुखमय था, लेकिन देवयानी की दासी शर्मिष्ठा जो दानव वंश से थी इतनी सुन्दर थी जिसकी वजह से ययाति उस पे रीझे हुए थे, एक बार जब शर्मिष्ठा कुए में गिर गई तो उसे कुए से बाहर निकाल कर अपने प्रेम का इजहार ययाति ने उससे कर दिया।

आपको बता दे की शुक्राचार्य की वजह से दोनों खुलकर सामने न आ सके, ऐसी स्तिथि में ययाति ने छुपकर शर्मिष्ठा से विवाह कर लिया। देवयानी ने एक दिन दोनों को प्रेमालाप करते हुए देख लिया। तब अपने पिता से उसने शिकायत की और ययाति को पिता शुक्राचार्य ने तुरंत बूढ़े होने का श्राप दे दिया, लेकिन इसके बाद जब ययाति ने कहा कि इसका असर देवयानी पर भी पड़ेगा।

उल्लेखनीय है की ऊके बाद शुक्राचार्य ने कहा की अगर तुम्हे कोई अपनी जवानी दे दे तो तुम उसे भोग सकते हो अन्यथा ऐसे ही रहोगे। आपको बता दे की ययाति के पांच पुत्र थे, उसने जब अपने चार बड़े पुत्रो से पूछा तो उन्होंने साफ मना कर दिया। जब छोटे बेटे पुरू ने अपने बाप का दर्द सुना तो उसने अपनी अपने बाप को जवानी दे दी।

आपको बता दे की यह सब कुछ होने के बाद ययाति ने अपने चारों बेटों को राज्य से बेदखल कर दिया और उनको श्राप देते हुए कहा की तुम और तुम्हारे वंशज अपने बाप के बनाए राज में राज नही कर सकोगे। पुरू को उस राज्य का राजा बनाया गया और इसी पुरू के नाम से आगे जाके पुरू वंश कहलाया और बाकि चारो भाइयों का वंश यदुवंश कहलाया।

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