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जानिए कर्ण को क्यों कहा जाता है दानवीर

Monday, December 4, 2017 12:43:46 PM
जानिए कर्ण को क्यों कहा जाता है दानवीर

धर्म डेस्क। दान करते वक्त मन में अगर कोई भी भावना हो कि किए गए दान का खास फल प्राप्त होगा तो दान करने का पुण्य फल नहीं मिलता और दान करना निष्फल हो जाता है। भगवान कृष्ण ने भी अर्जुन को यही उपदेश दिया था, आइए जानते हैं इसके बारे में…

 

 

कर्ण एक दानवीर योद्धा थे। उनके दानवीर होने को लेकर सभी उनकी प्रशंसा करते थे परन्तु अर्जुन को कर्ण की प्रशंसा पसंद नहीं थी। इसी वजह से एक बार अर्जुन ने कृष्ण से पूछा कि कर्ण को दानवीर क्यों कहा जाता है और उन्हें क्यों नहीं। यह सुन कर कृष्ण ने दो पर्वत को सोने में बदल दिया और अर्जुन से कहा कि वह सारा सोना गांव वालों के बीच में बांट दे। तब अर्जुन गांव गए और सारे लोगों से कहा कि पर्वत के पास इकट्ठा हो जाएं क्योंकि वह सोना बांटने जा रहे हैं। यह सुन कर गांव वालों ने अर्जुन की जय जय कार करनी शुरू कर दी और अर्जुन छाती चौड़ी कर पर्वत की तरफ चल दिए। दो दिन और दो रातों तक अर्जुन ने सोने का पर्वत खोदा और खोदकर सोना गांव वालों में बांटा। इतने से पर्वत पर कोई असर नहीं हुआ। लेकिन बहुत सारे गांव वाले वापस आ के कतार में खड़े होकर इंतज़ार करने लगे। अर्जुन अब थक चुके थे लेकिन अपने अहंकार को नहीं छोड़ रहे थे।

 

 

उन्होंने कृष्ण से कहा कि अब वो थोड़ा आराम करना चाहते हैं इसके बिना वो खुदाई नहीं कर पाएंगे। तब कृष्ण ने कर्ण को बुलाया और कहा कि सोने के पर्वत को इन गांव वालों के बीच में बांट दें। कर्ण ने सारे गांव वालों को बुलाया और कहा कि ये दोनों सोने के पर्वत उनके हैं और उनसे आकर सोना ले लो। अर्जुन भौचक्के हो गए और सोचने लगे कि यह ख्याल उनके दिमाग में क्यों नहीं आया। तभी कृष्ण मुस्कुराए और अर्जुन से बोले कि तुम्हें सोने से मोह हो गया था और तुम गांव वालों को उतना ही सोना दे रहे थे जितना तुम्हें लगता था कि उन्हें जरुरत है। इसलिए सोने को दान में कितना देना है इसका आकार तुम तय कर रहे थे। लेकिन कर्ण ने यह सब नहीं सोचा और दान देने के बाद कर्ण वहां से दूर हट गया। वह नहीं चाहता कि कोई उसकी प्रशंसा करे और ना उसे इस बात से कोई फर्क पड़ता है कि कोई उसके पीछे उसके बारे में क्या बोलता है। यह एक निशानी है उस आदमी की जो आत्मविश्वाश हांसिल कर चुका है। जो व्यक्ति दान देने के बाद ये चाहता है कि उसकी दान देने को लेकर लोग प्रशंसा करें वह कभी भी दानवीर नहीं हो सकता है और न ही उसे किए गए दान का फल प्राप्त होता है।

 

Source: Google

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